परिचय Shivaratri भारतीय संस्कृति और दार्शनिक परंपरा में केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्म-साक्षात्कार, मानसिक अनुशासन और आध्यात्मिक उत्कर्ष का एक महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान करता है। इस अवसर पर शिव को केवल एक दैवीय शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक आदर्श चेतना के प्रतीक के रूप में देखने की आवश्यकता है। योग, ध्यान और उपवास जैसी प्रक्रियाएँ इस पर्व को केवल कर्मकांडों की श्रेणी में सीमित न रखते हुए, आत्म-परिष्कार की दिशा में एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। Spiritual consciousness and importance of Shivaratri ईशा फाउंडेशन , जिसे आधुनिक आध्यात्मिक पुनर्जागरण में एक अग्रणी संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त है, इस विषय पर गहन अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। शिवरात्रि की व्याख्या केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न होकर, इसे एक उच्च आध्यात्मिक आयाम में देखा जाता है। इस संदर्भ में निम्नलिखित तत्व महत्वपूर्ण हैं: पूर्ण जागरूकता और योगिक अनुशासन: योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना को पुनर्संगठित करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। शिवरात्रि पर योग साधना करने से व्यक्ति...
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